मिंली थी ज़िन्दगी किसी के काम आने लिये ,
पर वक्त बिता रहा है कागज टुकडे कमाने के लिये ।
क्या करोगे इतना पैसा ,कमा कर ??
ना कफ़न में 'जैब' है 'ना कब्र में 'अलमीरा' !
और ये मौत के फरीस्ते तो रिश्वत भी नहीं लेते।
खुदा की की महोबत को फ़ना कोन करेगा ?
सभी बन्दे नेक तो गुनाह कोन करेगा ?
ए खुदा मेरे इन दोस्तों को सलामत रखना। ....
वरना मेरी सलामती की दूवा कोन करेगा ?
और रखना मेरे दुश्मनो को भी महफूज़। ......
वरना मेरी तेरी पास आने की दुवा कोन करेगा। .. ?
खुदा ने मुझे कहा ," इतने दोस्त ना बना तू ,धोखा खा जायेगा "
गैरों की जरुरत तुझे कहा यहाँ तो अपने ही काफी है
