Sunday, 2 April 2017

मर्ज खुदगर्ज मेहनतकश

मेहनत से उठा हूॅं , मेहनत का दर्द जानता हूॅ,
आसमाॅं से ज्‍यादा जमी की कद्र जानता हूँ

लचिला पेड था जो झेल गया ऑंधिया ,
मै मगरूर दरख्‍तों का हश्र जानता हॅूं


छोटे से बडा बन्‍ाना आसॉं नहीं होता,
इस जिंदगी मैं  कितना जरुरी होता है सब्र जानता हूँ 

मेहनत बढ़ी तो किस्मत भी बढ़ चली ,
इन छालों में छिपी लकीरो  का असर जानता हूं । 

बेवक्त बेबाक बेवजह यूँही मुस्करा देता हू । 
आधे दुश्मनो को यू ही हरा देता हू । 

काफी कुछ पाया है मैने पर अपना कुछ न माना है ,
क्योकी एक दिन माटी में मिलना है ये जाना है मैने 




Tuesday, 28 February 2017

ज़िन्दगी

मिंली थी ज़िन्दगी किसी के  काम आने  लिये ,
पर वक्त बिता रहा है कागज  टुकडे कमाने के लिये ।

क्या करोगे इतना पैसा ,कमा कर ??
ना कफ़न में 'जैब' है 'ना कब्र में 'अलमीरा' !

और ये मौत के फरीस्ते तो रिश्वत भी नहीं लेते। 

खुदा की की महोबत को फ़ना कोन करेगा ?
सभी बन्दे नेक तो गुनाह कोन करेगा ?

ए खुदा मेरे इन दोस्तों को सलामत रखना। .... 
वरना मेरी सलामती की दूवा कोन करेगा ?

और रखना मेरे दुश्मनो को भी महफूज़। ...... 
वरना मेरी तेरी पास आने की दुवा कोन करेगा। .. ?

खुदा ने मुझे कहा ," इतने दोस्त ना बना तू ,धोखा खा जायेगा "
गैरों की जरुरत तुझे  कहा यहाँ तो अपने ही काफी है 



Monday, 13 February 2017

आज का दिन बड़ा  और लम्बा था आज मैं  कुछ  जैदा बात नहीं की किससे भी आज मान कुछ सुबह से  ही उदास थाKhullam Khullam Khulla: Rishi Kapoor UncensoredKhullam Khulla: Rishi Kapoor UncensoredKhullam Khulla: Rishi Kapoor UncensoredKhulla: Rishi Kapoor Uncensored