Tuesday, 28 February 2017

ज़िन्दगी

मिंली थी ज़िन्दगी किसी के  काम आने  लिये ,
पर वक्त बिता रहा है कागज  टुकडे कमाने के लिये ।

क्या करोगे इतना पैसा ,कमा कर ??
ना कफ़न में 'जैब' है 'ना कब्र में 'अलमीरा' !

और ये मौत के फरीस्ते तो रिश्वत भी नहीं लेते। 

खुदा की की महोबत को फ़ना कोन करेगा ?
सभी बन्दे नेक तो गुनाह कोन करेगा ?

ए खुदा मेरे इन दोस्तों को सलामत रखना। .... 
वरना मेरी सलामती की दूवा कोन करेगा ?

और रखना मेरे दुश्मनो को भी महफूज़। ...... 
वरना मेरी तेरी पास आने की दुवा कोन करेगा। .. ?

खुदा ने मुझे कहा ," इतने दोस्त ना बना तू ,धोखा खा जायेगा "
गैरों की जरुरत तुझे  कहा यहाँ तो अपने ही काफी है 



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